Haldiram परिवार के बीच संपत्ति को लेकर छिड़ा विवाद, जानिए क्या है लड़ाई की पूरी कहानी?

0
6
Haldiram परिवार के बीच संपत्ति को लेकर छिड़ा विवाद, जानिए क्या है लड़ाई की पूरी कहानी?
नई दिल्ली. अपने पति से अलग रह रही एक महिला का पति की मौत के बाद उसकी संपत्तियों पर अधिकार का संघर्ष कोलकाता के हल्दीराम (Haldiram) परिवार में मचे घमासान की मूल जड़ बन गया है. इस परिवार में हाल में ही दिग्गज कारोबारी महेश अग्रवाल का निधन हुआ है. परिवार से जुड़े अंदरूनी लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह लड़ाई और भी कड़वी हो सकती है. इसकी वजह यह है कि यह प्रॉपर्टी सैकड़ों करोड़ रुपए की है. यह झगड़ा उस वक्त उस वक्त सार्वजनिक हो गया जब कोलकाता में हल्दीराम के दो स्टोर्स पर हंगामा करने वालों ने हमला कर दिया. इन लोगों को परिवार के एक तबके का समर्थन हासिल था. इस हमले में प्रॉपर्टी का नुकसान हुआ और बैंक डिटेल, लैपटॉप्स और पेन ड्राइव्स जैसी कई महंगी चीजें गायब हो गईं. इनमें कंपनी और इसकी प्रॉपर्टीज को लेकर कई अहम और गोपनीय जानकारियां थीं.

कोलकाता के एक सीनियर बिजनेस एनालिस्ट के मुताबिक, “परिवार में तनाव था. महेश अग्रवाल की मौत के साथ यह झगड़ा अब सतह पर आ गया है.” महेश को कोलकाता में उनके दोस्त गर्मजोशी से मिस्टर जेंटलमैन कहा कहते थे. कोलकाता में महेश चार बड़े हल्दीराम स्टोर चलाते थे. बच्चे भी उन्हें याद करके भावुक हो जाते हैं. वे उन्हें अंकल विली वोंका कहते थे. 1964 के रोनाल्ड डल के नोवल चार्ली एंड चॉकलेट फैक्टरी के कैरेक्टर की तरह वह अग्रवाल परिवार के हर सदस्य की देखरेख करते थे.

कंपनी की विरासत गंगा भिशेन अग्रवाल से शुरू होती है. उन्हें उनके गेहुआं-हल्दी जैसे रंग के चलते हल्दीराम कहा जाता था. यह परिवार बीकानेर का है. अग्रवाल परिवार का किराना स्टोर था और ये भुजिया सेव बेचा करते थे. उसके एक दशक बाद जब भारत आजाद हुआ तब ये परिवार कोलकाता आ बसा. अग्रवाल भाइयों में 1990 के दशक की शुरुआत में बंटवारा हो गया था. इस बंटवारे के तहत आउटलेट्स को जोन्स में बांट दिया गया था ताकि इनका स्वतंत्र रूप से चलाया जा सके.

मनोहरलाल और मधुसूदन ने उत्तर भारत के मार्केट्स की मांग की थी. शिव किशन को दक्षिण और पश्चिम भारत के मार्केट मिले और प्रभु शंकर और अशोक को पूर्वी भारत के बाजार मिले. 2013 में एक कोर्ट के आदेश के जरिए प्रभु शंकर और अशोक को हल्दीराम्स भुजियावाला नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था. इन दोनों ने इसकी नई ब्रांडिंग करके इसे “प्रभुजीः फ्रॉम दि हाउस ऑफ हल्दीराम्स” नाम दिया.तीन भौगोलिक इकाइयों और करीब 12 कंपनियों में बंटे हुए इस ब्रांड ने वित्त वर्ष 2019 में 7,130 करोड़ रुपये की कमाई की थी. हल्दीराम के उत्पादों की बिक्री हिंदुस्तान यूनिलीवर के फूड एंड रिफ्रेशमेंट डिवीजन के बराबर पहुंच गई थी. 2017-18 में हल्दीराम के उत्पादों की सम्मिलित बिक्री 6,241 करोड़ रुपये पर थी.

झगड़ा क्यों शुरू हुआ?
ऐसे में पूर्वी भारत का कारोबार संभाल रहे परिवार में झगड़े की वजह क्या रही? महेश अग्रवाल, प्रभु शंकर के चचेरे भाई थे. उनकी अपनी पत्नी मीना के साथ गंभीर दिक्कतें थीं. मीना अपने बच्चों के साथ पिछले करीब आठ साल से अलग रह रही थीं. महेश अक्सर दफ्तर में ही सो जाया करते थे. यहां तक कि उन्होंने मीना को तलाक का नोटिस भी भेजा लेकिन उन्होंने कोर्ट में इसके लिए ज्यादा जोर नहीं दिया. मारवाड़ी परिवार हमेशा मजबूती से जुड़े होते हैं, इनमें शायद ही कभी आंतरिक झगड़े सार्वजनिक होते हैं.

महेश का लिवर ट्रांसप्लांट हुआ था. उन्हें इलाज के लिए शरद अग्रवाल सिंगापुर लेकर गए थे. सालों तक शरद ही उनके भरोसेमंद साथी रहे थे. शरद के पिता रवि, महेश के चचेरे भाई थी. रवि की मौत बीकानेर में 1990 के दशक में एक कार एक्सीडेंट में हो गई थी. सालों तक शरद ही बीमार महेश की ओर से फूड और मिठाइयों का कारोबार चलाते रहे थे.

3 अप्रैल 2020 को महेश की सिंगापुर में मौत हो गई. इसके एक दिन बाद ही उनका 57वां जन्मदिन था. उनसे अलग रह रहीं पत्नी मीना और बेटी अवनी महेश की मृत्यु के वक्त सिंगापुर में थीं. महेश को इलाज के लिए सिंगापुर ले गए शरद तब तक कोलकाता वापस आ गए थे.

तभी अग्रवाल परिवार को यह पता चला कि महेश ने 1,200 करोड़ रुपये की अपनी पुश्तैनी संपत्तियों को तीन हिस्सों में बांटा है. इसमें से एक-तिहाई हिस्सा बेटे प्रतीक को, एक-तिहाई बहन मंजू को और इतना ही हिस्सा शरद को दिया गया था.

उन्होंने एक सख्त शर्त रखी थी कि किसी को भी इन संपत्तियों को बेचने की इजाजत नहीं होगी और ये तीनों ही लोग उनकी खड़ी की गई फूड कंपनी हल्दीराम भुजियावाला (प्रतीक फूड्स) ब्रांड की शाखा को इसके 4,000 करोड़ रुपए के टर्नओवर से आगे लेकर जाएंगे. प्रतीक से कहा गया गया था कि वे अपनी मां को हर महीने जेब खर्च के लिए 1 लाख रुपये देंगे. महेश ने अपनी बेटियों की पढ़ाई के खर्च की भी व्यवस्था की थी और अपनी हर बेटी की शादी के लिए 3-3 करोड़ रुपये रखे थे.

प्रतीक और उनकी बहन अवनी कोलकाता में रहते हैं. बड़ी बेटी आंचल एक वैज्ञानिक हैं और वे सैनफ्रांसिस्को में सैनडिस्क में काम करती हैं. एक अन्य बेटी अंतरा यूके की डरहम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं. शहर में हल्दीराम के आउटलेट्स के अलावा, इन प्रॉपर्टीज में कुछ रियल एस्टेट और एक मोनोटेल, कोलकाता एयरपोर्ट के पास एक लग्जरी बिजनेस होटल भी शामिल है.

एक उलझा हुआ बंटवारा
लेकिन, मीना इस व्यवस्था से नाखुश थीं और उन्होंने महेश अग्रवाल की वसीयत में बदलाव के लिए दबाव डाला. घोष बताते हैं, “ऐसे में पूरा झगड़ा उभकर सामने आ गया. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था जबकि पूरे देश में फैले हल्दीराम परिवार में दिक्कतें सामने आई थीं. दिल्ली के कामकाज को लेकर भी इनमें झगड़ा सामने आ चुका था.”

लेखिका पवित्रा कुमार ने अपनी किताब भुजिया बैरन्सः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ हाउ हल्दीराम बिल्ट ए 5,000 करोड़ रुपी एंपायर में लिखा है, “उनकी सफलता की उन्हें कीमत चुकानी पड़ी थी. हालांकि, वे सफल हो रहे थे, लेकिन इनके यहां कई मुश्किलें भी थीं. मारियो पुजो ने गॉडफादर में सटीक लिखा हैः “हर परिवार में बुरी यादें होती हैं.” इस परिवार में भी दर्द, नुकसान और निराशा की कुछ पुरानी अलमारियां भरी हुई थीं. ऐसे ही मौकों पर किसी शख्स की असलियत और उसके चरित्र की पहचान होती है. ऐसे ही मौकों ने इस साम्राज्य की शक्ल तय की और एक भाई को दूसरे से अलहदा बना दिया.”

घोष ऐसी कुछ चीजों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में कोलकाता के लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है. वे कहते हैं, “हमें अब कई चीजें पता चल रही हैं. अब यह पता चल रहा है कि कैसे महेश पूरी तरह से शरद पर भरोसा करते थे और शरद ने तकरीबन अकेले ही उनकी ओर से पूरा कारोबार संभाले रखा रखा था. यहां तक वे ही उनका इलाज भी देख रहे थे. यह परिवार में एक ऐसा दुखद ट्रेंड दिखाता है जिसमें महेश के बेटे की कारोबार में कम दिलचस्पी जाहिर होती है.”

हल्दीराम के विस्तारित परिवार में अभी भी काफी तनाव दिख रहा है. मीना के संपत्तियों के बंटवारे में बदलाव और स्टोर्स और दूसरी प्रॉपर्टीज पर पूरा नियंत्रण मांगने के बाद चीजें हाथ से बाहर हो गईं.

शरद के परिवार की ओर से आए वकीलों ने शुरुआत में उन्हें बताया कि महेश की प्रॉपर्टी उनके दावों को साबित नहीं करती और केवल उनके बेटे को ही एक-तिहाई प्रॉपर्टी मिलेगी, बाकी की संपत्ति शरद और मंजू को मिलेगी.

मीना ने पूछा, महेश के लिए शरद कितने महत्वपूर्ण थे?
परिवार के एक अंदरूनी शख्स ने बताया, “उन्हें बताया गया कि शरद ही महेश की लाइफलाइन थे और वे ही महेश की ओर से कोलकाता में हल्दीराम के कारोबार को संभाल रहे थे. उन्हें प्रॉपर्टी के पेपर दिखाए गए और साथ ही शरद की ओर से उन्हें भेजे गए असंख्य व्हाट्सएप संदेश भी दिखाए गए जिनमें उन्होंने मीना को अपने बीमार पति से मिलने जाने के लिए कहा था, जिनका उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया था.”

परिवार के एक अंदरूनी शख्स ने मीना को यह भी बताया कि इस बात के पूरे आसार हैं कि शरद और मंजू कारोबार में वैध हक के अपने दावे के लिए इस पर नियंत्रण की कोशिशें भी कर सकते हैं. लेकिन, मीना और उनकी बेटी अवनी इस पर सहमत नहीं हुईं. आश्चर्यजनक रूप से, तनाव बढ़ते वक्त प्रतीक खामोश थे.

कोलकाता में कइयों का दावा है कि प्रतीक की कारोबार में कभी कोई दिलचस्पी नहीं रही है. परिवार के अंदरूनी शख्स ने बताया, “वे महेश के बेटे हैं और कंपनी को हल्दीराम भुजियावाला (प्रतीक फूड्स) का नया नाम दिया गया था, लेकिन शरद ही इस धंधे को महेश के साथ चला रहे थे. हर कोई जानता है कि महेश कारोबार को लेकर कितना दूरदर्शी नजरिया रखते थे. लेकिन, जब उन्हें लिवर की बीमारी हुई तो शरद ही उनके लिए सबकुछ थे.”

सार्वजनिक हुआ झगड़ा
इस दौरान चीजों ने गंदी शक्ल ले ली. महेश की बेटी अवनी ने फेसबुक पर आकर बताया कि कैसे कोलकाता में उनके स्टोर्स को 11 जुलाई 2020 को नुकसान पहुंचाया गया. इसमें उन्होंने कथित तौर पर विस्तारित अग्रवाल परिवार के लोगों द्वारा भाड़े पर लिए गए गुंडों को जिम्मेदार बताया था. उन्होंने कुछ तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि उनके परिवार के सारे बैंक ब्योरे और प्रॉपर्टी के कागज खो गए हैं.

अवनी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, “हम शॉक्ड और डरे हुए हैं. हमें नहीं पता कि क्या करना है.” अवनी ने आरोप लगाया है कि तोड़फोड़ करने वाली भीड़ की अगुवाई शरद अग्रवाल, प्रभु शंकर की बहन मंजू अग्रवाल और मंजू का बेटा वत्सल अग्रवाल कर रहे थे. प्रभु शंकर के भाई को ही हल्दीराम के पूर्वी साम्राज्य की जिम्मेदारी दी गई थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि ये तीनों दुकान में जबरदस्ती घुस गए, सीसीटीवी कैमरे, टेलीफोन लाइनें काट दीं, कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क चुरा लीं, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें बैंक अकाउंट ब्योरे और महेश अग्रवाल के इस्तेमाल किए जाने वाले ईमेल्स के पासवर्ड देने के लिए मजबूर किया.

ये गुंडे बहीखाते, कानूनी पेपर, प्रॉपर्टी के कागजात, आधिकारिक स्टैंप्स, शेयर सर्टिफिकेट्स, दस्तखत किए गए चेक, खरीदारी के बिल, इनकम टैक्स फाइलें, बैलेंस शीट्स समेत दूसरे दस्तावेज और महेश के लैपटॉप्स और पेन ड्राइव्स समेत दूसरी चीजें ले गए. उन्होंने दावा किया कि इस तोड़फोड़ से उनकी प्रॉपर्टी को करीब 80 लाख का नुकसान हुआ है. अवनी ने आगे कहा है कि वे अपने कारोबार, कर्मचारियों और अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन के पुलिसवालों का कहना है कि एक शिकायत दर्ज की गई है और हल्दीराम परिवार के कुछ सदस्यों से पूछताछ भी की गई है, लेकिन किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है.

एक अफसर ने बताया, “मामले की जांच जारी है और इसमें आगे की कार्यवाही तभी होगी जबकि दोनों पक्ष आरोप लगाएंगे.” अफसर ने यह भी कहा कि अभी तक यह साफ नहीं है कि यह लड़ाई क्यों हुई और विस्तारित हल्दीराम परिवार के कुछ सदस्य स्टोर्स पर हमला क्यों करेंगे जिसकी वजह यह जान पड़ रही है कि कामकाज पर नियंत्रण कायम करना समस्या की मूल वजह है.

अभी यह मामला शांत नहीं हुआ है. पूर्वी भारत में कारोबार पर नियंत्रण को लेकर कोलकाता में हल्दीराम के विस्तारित परिवार में झगड़े और बढ़ने के पूरे आसार हैं. अवनी और उनकी मां इस मामले को स्टोर पर हुए झगड़े से कहीं आगे ले जाना चाहती हैं. ये दोनों महेश की लिखी गई वसीयत को कोर्ट में भी चुनौती दे सकती हैं.

दिग्गज बिजनेस एनालिस्ट और पीडब्ल्यूसी के पूर्व पार्टनर, अंबरीश दासगुप्ता हालांकि, इसे एक अलग मामले के तौर पर देखते हैं. वे कहते हैं, “यह एक अलहदा घटना है जिसकी वजह से कुछ तनाव पैदा हुआ है. आपको यह देखना होगा कि कैसे मारवाड़ियों ने पश्चिम बंगाल और देश के दूसरे हिस्सों में पीढ़ियों से कारोबारों को खड़ा किया है. मैं हल्दीराम की इस घटना को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हूं और मैं निश्चिंत हूं कि वे इन मसलों को आपस में निपटा लेंगे.” उत्तरी भारत में कारोबार पर हक को लेकर हल्दीराम परिवार के सदस्यों के बीच चली एक कानूनी जंग के दशकों बाद पूर्वी हिस्सों में कारोबार पर हक को लेकर पैदा हुई रार ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है.

लेखक:- शांतनु गुहा रे, सीनियर जर्नलिस्ट



Source link