वर्क फ्रॉम होम का प्रयोग सफल रहा तो वैश्विक स्तर पर बदल सकता है वर्किंग कल्चर

0
44

21 दिनों के लिए देश लाॅकडाउन है। कई जगह कफ्यू जैसे हालात है। स्कूल, माॅल, सिनेमा हाॅल, रेल, बस, ऑफिस सबकुछ बंद है। लोग घरों में बंद है। लाखों-करोड़ों कर्मचारी वर्क फ्रार्म होम यानी घर से काम कर रहे हैं। इन दिनों बेडरूम से लेकर डाइनिंग एरिया का रूपरेखा बदल चुका है। इन जगहों पर अब घर से काम कर रहे कर्मचारियों का कब्जा है यानी यहां उनका कुर्सी टेबल और लैपटाप ने जगह बना ली है।

वे यहां से घंटों हैंगआउट, स्काइप, वीडियो काल, क्रांफ्रेस काॅल पर एक्टिव रहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ कर्मचारी और बाॅस के बीच रिश्तों में भी नरमी आई है। वे एक दूसरे की परेशानी को समझते हुए काम कर रहे हैं। इसे हम खौफ भरे माहौल में आशा की चिनगारी की तरह देख सकते हैं। अगर कंपनी इस नए कल्चर में ढ़ल गई तो आने वाले समय में नया वर्क कल्चर में नया बदलाव देखने को मिल सकता है।

तो क्या बदल जाएगी वर्किंग स्टाइल?

बता दें कि इन दिनों अमेरिका सहित दुनिया भर की कंपनियां वर्क फ्रॉम होम करके रिमोट वर्क प्रैक्टिस आजमा रही है। विशेषकों के मुताबिक कोरोनावायरस के चलते मजबूरी में लागू किया गया यह वर्क फ्रॉम होम का विकल्प अगर काम कर गया तो यह ऑफिस वर्किंग की दुनिया को पूरी बदल सकता है। अमेरिकी कंपनी ऑप्टिकल नेटवर्क की सीईओ और मॉडर्न लॉ फर्म: हाउ टू थ्राइव इन एन इरा ऑफ रैपिड टेक्नोलॉजी चेन्ज की लेखक हैनन लांडा कहती है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा वर्क फ्रॉम होम का एक्सपेरिमेंट है। यह वर्करों के परंपरागत ऑफिस से बाहर सुस्ती से काम करने के कलंक को खत्म कर सकता है। जो कंपनिया और बिजनेस अभी अभी रिमोट वर्क की चुनौतियों और समस्याओं का सामना कर रहे हैं, यह उनके लिए एक नया अवसर भी है।

कोरोना का प्रकोप खत्म होने के बाद इस समीक्षा कर सकती है कंपनियां

शायद अपने लचीले विकल्पों को अपनाएंगे, टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में सुधार करेंगे। साथ ही अपने वर्तमान कंपनी ऑपरेशनल प्रोसेस की समीक्षा भी करेंगे। वास्तव में यह कंपनियों के लिए एक अवसर और उनको जगाने वाली चीज है, जिसका इसके पहले उन्होंने कभी सामना नहीं किया था। कुछ बिजनेस के लिए शायद यह साबित होगा कि रिमोट वर्क एक काम का एक वास्तविक विकल्प है और यह बिजनेस को विस्तार देने में भी सहायक है।