कैसे भीलवाड़ा कोरोना वायरस के प्रकोप का एपीसेंटर बन गया

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राजस्थान में 3,000 से अधिक कोरोना वायरस के परीक्षण किए गए और इनमें से 688 सिर्फ भीलवाड़ा के हैं। अभी तक राजस्थान में 56 कोरोना के मामले आये है , जिसमें 25 भीलवाड़ा से शामिल हैं। राजस्थान के दो कोरोना से मौत भी इसी क्षेत्र से हुई है।

28 मार्च को, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आदेश दिया कि एहतियात के तौर पर कोई भी भीलवाड़ा जिले को न छोड़े। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि सरकार पिछले नौ दिनों में जिले के कुछ हिस्सों में कई बार कर्फ्यू लगाने और आने-जाने के रास्तों को बंद करने के बाद सेना द्वारा फ्लैग मार्च आयोजित करने पर भी विचार कर रही है।

भीलवाड़ा शहर, जो की जिला मुख्यालय भी है, में 77,000 घर और 400,000 की आबादी है। शहर में कोरोना वायरस का संक्रमण शायद 86 बिस्तरों वाले बांगुर अस्पताल में शुरू हुआ, जहां राजस्थान और आस-पास के राज्यों के कम से कम एक दर्जन जिलों के मरीज़ आते हैं । इस अस्पताल के ज्यादातर डॉक्टर, कर्मचारी और मरीज इस बीमारी से पीड़ित हुए हैं, और कई लोगों का मानना है कि वायरस की उत्पत्ति यहां हुई है। अब तक पुष्टि किए गए सभी मामले वे हैं जो पहले संक्रमित पाए गए डॉक्टर के संपर्क में आए थे या वो रोगी और कर्मचारी संपर्क ट्रेसिंग के माध्यम से पहचाने गए।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल के एक डॉक्टर ने पश्चिम एशिया के कुछ मेहमान, जिन्हें वायरस के लिए जांच नहीं की गई थी और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए छोड़ दिया गया था, के लिए मेजबान की भूमिका निभाई, । माना जाता है कि डॉक्टर ने अपने सहकर्मियों, कर्मचारियों और रोगियों, जिनमें से कुछ आईसीयू में थे या उनकी सर्जरी हुई थी, को संक्रमित कर दिया स्वास्थ्य मंत्री शर्मा के अनुसार, सरकार ने डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है क्योंकि वह इस बीमारी के प्रसार के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है।

लेकिन डॉक्टर 50 वर्षीय एक मरीज को दोषी ठहरा रहे हैं जिसको निमोनिया हुआ था। वे कहते हैं कि मरीज गंभीर हालत में था और उसे जयपुर के अस्पताल में रेफर किया गया था जहां उसकी मौत हो गई थी। उन्हें संदेह है कि मरीज को कोविद -19 था लेकिन कहीं भी उसकी मृत्यु के बाद न तो परीक्षण किया गया और न ही शव परीक्षण किया गया।

किसी भी मामले में, संक्रमण के प्रसार को रोकने में विफल रहने के लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अपने बीच में वायरस की मौजूदगी का एहसास होने के बाद भी, अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि अधिकारियों ने अपनी ओपीडी और आईसीयू चलाना जारी रखा। परिणामस्वरूप, कुछ 7,000 मरीज संक्रमित डॉक्टरों और कर्मचारियों के सीधे संपर्क में आए।

नतीजतन, 332 टीमों ने शहर की पूरी आबादी का सर्वेक्षण किया है, जबकि 1,900 से अधिक टीमों ने 2.4 मिलियन ग्रामीण आबादी की स्क्रीनिंग की है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के उन 18,000 लोगों को पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिनमे फ्लू जैसे लक्षण पाए गए थे। सरकार ने 6,500 संदिग्धों को घर कुरआनटाइन में रखा है।