भीलवाड़ा मॉडल जिसे सरकार Covid -19 से लड़ने के लिए पूरे भारत में उपयोग करना चाह रहा है

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चूंकि देश भर में कोरोनोवायरस के मामले बढ़ रहे हैं, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने कहा है कि राज्यों में वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए भीलवाड़ा मॉडल को अपनाने पर ध्यान दिया जा सकता है।

सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से ये बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार अमरजीत सिन्हा ने भीलवाड़ा मॉडल का समर्थन किया है।

कपड़ा व्यापार का मुख्य केंद्र राजस्थान के भीलवाड़ा की जनसँख्या 24 लाख से अधिक है, और यह शहर Covid -19 के प्रकोप का मुख्य केंद्र में से एक है। यहाँ 27 सकारात्मक मामलों और दो मौतें दर्ज हुए हैं।

लेकिन राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन द्वारा अपनाई गई रणनीति ने यह सुनिश्चित किया है कि भीलवाड़ा ने एक सप्ताह में कोई भी नया Covid -19 मामला दर्ज नहीं किया है, जबकि सकारात्मक परीक्षण करने वाले 13 मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं।

भीलवाड़ा मॉडल क्या है?

एक साक्षात्कार में, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह, जो कि चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रभारी हैं, ने कहा कि भीलवाड़ा की रणनीति में छह बहुत बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं – जैसे पूरे जिले को पूरी तरह से आइसोलेट करना; हॉटस्पॉट्स की मैपिंग; डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग; कांटेक्ट ट्रेसिंग; आइसोलेशन एवं क्वारंटाइन वार्ड का विस्तार; और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक निगरानी तंत्र तैयार करना है।

भीलवाड़ा को आसपास के क्षेत्रों से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया था। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग में लगभग 22.39 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई, जिनमें से कई लोगों का एक से अधिक बार स्क्रीनिंग हुए। कुल मिलाकर, जिले में 1,937 टीमों की स्थापना की गई, जिन्होंने 22 मार्च और 2 अप्रैल के बीच 4.41 लाख घरों का सर्वेक्षण किया।

“हमने इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले 14,000 लोगों की पहचान की और उन्हें हमारी निगरानी सूची में रखा। हमारी स्वास्थ्य टीम, यह देखने के लिए कि क्या वे किसी भी लक्षण का प्रदर्शन कर रहे हैं, ने दिन में दो बार इन मामलों का पड़ताल किया,” सिंह ने कहा।

जिले को अलग-थलग करना

मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में सिंह ने कहा कि भीलवाड़ा में जिला प्रशासन द्वारा दोतरफा दृष्टिकोण अपनाया गया था।

पहले चरण में 20 मार्च से, यानि देशव्यापी तालाबंदी के पांच दिन पहले, ही धारा 144 के तहत कर्फ्यू लगा दिया गया और केवल आवश्यक सेवाओं के लिए ही अनुमति दी गई। जिले में आने-जाने वाले सभी मार्गों पर चेक-पोस्ट स्थापित किया गया और साथ ही शहर और जिला सीमाओं को तुरंत सील कर दिया गया।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी तरह की कोई त्रुटि न हो, पड़ोसी जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों से अनुरोध किया गया था कि वे भीलवाड़ा के साथ अपनी सीमाओं को सील करें। सार्वजनिक और निजी वाहनों आवाजाही के साथ सभी रेल सेवाओं को रोक दिया गया और जिले भर के सभी उद्योग और ईंट भट्टे बंद कर दिए गए।

दूसरा चरण 2 अप्रैल से शुरू हुआ जो और भी अधिक कठोर था, क्योंकि पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद कर दी गयी थीं।

“शहर एक भूत शहर जैसा दिखता था। हमें काफी पहले ही एहसास हो गया था कि इस तरह के निर्मम नियंत्रण के बिना, प्रसार को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। सिंह ने कहा कि हमने Covid -19 से संक्रमित क्षेत्र एवं इससे जुड़े हुए जिले के बफर क्षेत्रों को नो-मूवमेंट जोन बना दिया।

क्लस्टरिंग-मैपिंग, कीटाणुशोधन और क्वारंटाइन

जिले को पूरी तरह से आइसोलेट करने के बाद, सकारात्मक मामलों की पहचान करने के लिए स्वास्थ्य दल के द्वारा क्लस्टर मैपिंग किया गया और छह क्षेत्रों की पहचान की गई। संदिग्ध मामलों की निरंतर जांच के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया।

आक्रामक परीक्षण और संपर्क ट्रेसिंग के साथ-साथ, जिला प्रशासन द्वारा शहर के कोने-कोने को कीटाणुरहित किया गया जिसमे वो सभी क्षेत्र जहाँ पर सकारात्मक मामलों का पता चला है, सभी बफ़र ज़ोन, एम्बुलेंस, पुलिस वाहन, स्क्रीनिंग केंद्र, क्वारंटाइन केंद्र, कलेक्ट्रेट, पुलिस स्टेशन और अन्य सार्वजनिक कार्यालय शामिल थे।

एक कठोर स्क्रीनिंग की रणनीति अपनाई गई एवं वायरस द्वारा प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ प्रवासी आबादी की स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दिया गया। पूरे जिले में सर्वेक्षण करने के लिए टीमों को स्पष्ट रूप से सीमांकित क्षेत्र दिए गए थे। प्रत्येक 10 सर्वेक्षण टीमों के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था।

क्वारंटाइन की सुविधाओं को भी बढ़ा दिया गया था। विशेष Covid -19 अस्पतालों के अलावा, जिला प्रशासन ने चार निजी अस्पतालों को क्वारंटाइन केंद्रों में परिवर्तित किया। प्रत्येक अस्पताल में 25 बेड थे, साथ ही 27 होटलों में 1,541 कमरों को भी क्वारंटाइन केंद्र बनाया गया।

शहर में छह 24 × 7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए, जिनमें समाहरणालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय, नगर परिषद और उप-विभागीय कार्यालय शामिल हैं।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि 2 अप्रैल को किए गए कड़े अलगाव उपायों के कारण लोग बहुत अधिक पीड़ित नहीं हैं, जिला प्रशासन ने आवश्यक किराने का सामान, फल ​​और सब्जियों और दूध की डोर-टू-डोर आपूर्ति शुरू की।

इसके अलावा, गरीबों और जरूरतमंदों को कच्चे भोजन के पैकेट और साथ ही पका हुआ भोजन वितरित किया गया। आवारा पशुओं के लिए चारा भी बांटा जा रहा है।